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अजमेर दरगाह बनी राजनीति का अखाड़ा! कोर्ट के फैसले पर छिड़ी बहस

अजमेर दरगाह को लेकर राजनीति चरम पर है। दरगाह के नीचे शिव मंदिर होने का दावा किया गया है। इसको लेकर निचली अदालत में एक याचिका भी डाली गई, जिसपर कोर्ट सुनवाई के लिए राजी हो गया। जिसके बाद से राजनीतिक बहस छिड़ गई है, क्योंकि मथुरा, वाराणसी और धार में मस्जिदों और दरगाहों पर इसी तरह के दावे किए गए हैं।

कोर्ट सुनवाई को राजी
अजमेर की एक सिविल अदालत बुधवार को अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोईनुद्दीन हसन चिश्ती की दरगाह में संकट मोचक महादेव मंदिर होने से जुड़ी याचिका को स्वीकार करते हुए सभी पक्षों को नोटिस जारी किया है। सिविल न्यायालय ने इस मामले में सुनवाई के लिए अगली तारीख 20 दिसंबर जारी की है।

अदालत में हिंदू सेवा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और सरिता विहार निवासी विष्णु गुप्ता ने वकील शशि रंजन कुमार सिंह के माध्यम से 26 सितम्बर को याचिका दायर की गई थी।

भाजपा ने कोर्ट का किया समर्थन
कोर्ट के इस फैसले की विपक्षी नेताओं ने तीखी आलोचना की है। विपक्ष ने कहा कि कुछ दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अजमेर दरगाह पर चादर भेजी थी, तो अब क्या हुआ। उधर, भाजपा के नेताओं ने दावा किया है कि इस तरह के विवादित ढांचे के नीचे मंदिरों की मौजूदगी की जांच करने का निर्णय उचित है।

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